Super Trader बुक समरी में हम खुद पर काम करना, अपने लिए working बिज़नेस प्लान बनाना, ट्रेडिंग सिस्टम बनाना, पोजीशन sizing strategy बनाना, और अपनी गलतियों पर काम करना सीखेंगे।
लेखक Van K. Tharp द्वारा लिखित Super Trader बुक, ट्रेडिंग में 100% सफलता प्राप्त करने के बारे में नहीं है। यह किताब हमारी ट्रेडिंग साइकोलॉजी, माइंड सेट, working प्लान, बिज़नेस प्लान, रिस्क मैनेजमेंट के बारे में विस्तार से जानकारी देती हैं। साथ ही हम अपनी गलतियों को कैसे कम कर सकते है और प्रॉफिट को बढ़ा सकते है इस विचार पर भी एक नजर डालती है।
यह बुक हमें भावनात्मक रूप से ट्रेडिंग के लिए तैयार करती है। ट्रेडिंग करना आसान है लेकिन ट्रेडिंग से पैसा बनाना यह एक अलग ही बात है। तो क्यों ना हम पैसा बनाना सीखें।
खुद पर काम करना
Commitment: एक छोटी सी कहावत है कि हम अपने काम के प्रति committed नहीं है तो हम हर परेशानी पर नाचने लगेंगे। किसी काम के प्रति committed होने से हम;
- परेशानियों से भागते नहीं हैं।
- अपने काम के प्रति वफ़ादार रहते है।
- Negativity का हम पर कम असर होता है।
- हारने पर गलतियों से सीखने और फिर से प्रयास करने संभावना बढ़ जाती है।
व्यक्तिगत जिम्मेदारी: हम एक ट्रेडर के रूप में बेहतर result चाहते हैं। तो हमें अपने रिजल्ट की जिम्मेदारी खुद लेनी होंगी। तभी हम अपने रिजल्ट की गलतियों को देखेंगे और उस पर काम करेंगे।
हमें मैं ही क्यों, से मैं ही क्यों नहीं में आना पड़ेगा।
जब तक हम दूसरों को दोष देते रहेंगे कि आज का मार्केट ख़राब था, मेरे सिस्टम ने काम नहीं किया, family की वजह से mood off हो गया, और भी अनेक प्रकार के बहाने हमें ट्रेडिंग सफ़लता से दूर ले जाते हैं।
स्वयं को समय दे: ट्रेडिंग में हमारा माइंडसेट मायने रखता है। इसीलिए हमें खुद को समय देना होगा। दिन में हमें कुछ समय अपने लिए निकालना होगा जिससे हम;
- आज के दिन और पल पर focus कर सके।
- तोड़ा समय हँस सके।
- Thanks giving दे सके।
- Meditation और Natural sound को सुन सके।
- प्यार कर सके।
- हेल्थ के लिए ग़हरी सांस ले सके।
वर्किंग बिज़नेस प्लान
बिजनेस प्लान: हम सभी जानते हैं कि बिजनेस प्लान का मतलब एक working document से होता है। जिसमें एक ट्रेडिंग बिजनेस की Activities और goals लिखे होते हैं, और उन्हें प्राप्त करने के तरीके भी।
एक बिजनेस प्लान के अंदर और भी चीजें शामिल होती है जैसे ट्रेडिंग सिस्टम, मनी मैनेजमेंट प्लान, ट्रेडिंग प्लान, education प्लान, loss accepting प्लान, disaster प्लान, पोजीशन साइजिंग प्लान आदि।
जो व्यक्ति सीखना बंद कर देता है वह मृत व्यक्ति के समान हो जाता है।
एजुकेशन प्लान: एजुकेशन के बिना हमारा जीवन चल नहीं सकता, यह हम सभी जानते हैं। लेखक बताते हैं कि education प्लान होना ट्रेडिंग में सफलता के लिए जरूरी है।
ट्रेडिंग के चार quadrant: लेखक बताते हैं कि हर ट्रेडर्स चार प्रकार के quadrant में आते हैं।
- Employee; ट्रेडर्स जो सिस्टम के लिए काम करते हैं और सैलरी के रूप में इनकम कमाते हैं।
- Self-Employee; ट्रेडर्स जिसका खुद का सिस्टम होता है और वे खुद ट्रेडिंग करके पैसा बनाते हैं।
- बिजनेस ओनर ट्रेडर्स; जो अपना खुद का सिस्टम बनाते हैं और उस पर कंप्यूटर और दूसरे ट्रेडर्स की मदद से पैसा बनाते हैं।
- निवेशक ट्रेडर्स; जो अपने खुद के सिस्टम पर invest करते हैं और जिसके कारण उनका सिस्टम उन्हें higher returns देता है।
ट्रेडिंग सिस्टम बनाना
मार्केट में entry: लेखक हमें बताते है कि हम random entry लेकर भी ट्रेडिंग से पैसा बना सकते है। अगर हमारी साइकोलॉजी, Exit लेवल और पोजीशन sizing strategy सही हो तो।
जो लोग बेस्ट stock selection में लगे होते है, वे लोग किसी स्टॉक से लॉस होने पर, सारा दोष स्टॉक selection process पर डाल देते है। इसलिए लेखक सलाह देते है ट्रेडिंग में सफलता stock selection से नहीं मिंलती हैं, बल्कि हमें दूसरी चीजों पर भी ध्यान देना होता है।
Exit से पैसा बनता है entry से नहीं
अगर हम Entry सही जगह लेते है तो हमारा स्टॉप लॉस सही होगा और हम एक बेहतर रिस्क मैनजमेंट फॉलो करेंगे। जब हमारा रिस्क मैनेजमेंट ठीक हो तब हम एक बेहतर Exit प्लान फॉलो करने में सक्षम होते हैं। और अगर हमारे पास एक बेहतर एग्जिट स्ट्रेटेजी नहीं है तो हम मार्केट को अपना प्रॉफिट भी देंगे और अपनी जेब से भी।
बेहतर ट्रेडिंग प्लान: बेहतर ट्रेडिंग सिस्टम में अनेक प्रकार के तत्व शामिल होते है जो ट्रेडिंग की probability को बढ़ाते हैं।
पोजीशन साइजिंग स्ट्रेटेजी
Position Sizing: साधारण शब्दों में कहें तो पोजीशन साइजिंग number of Shares और Contract है जो किसी मार्केट में ट्रेड किये जाते है।
लेखक के अनुसार हमारे पास जो भी ट्रेडिंग कैपिटल है उसका हम कितना % रिस्क लेते है, उसके अनुसार हमारे number of shares और contract निकलेंगे, जिसे हम मार्केट में ट्रेड कर सकते हैं।
पोजीशन साइजिंग का महत्व: पोजीशन साइजिंग Directly हमारे रिस्क मैनेजमेंट और मनी मैनेजमेंट को Affect करती है। हर मार्केट के अनुसार पोजीशन साइजिंग बदल जाती है।
अगर हमारी 10,000 ट्रेडिंग कैपिटल है तो हम 20,000 वाला ट्रेड नहीं ले सकते। इसलिए लेखक हमें प्रत्येक ट्रेड के लिए रिस्क डिसाइड करने की सलाह देते है ताकि हम अपनी बेस्ट पोजीशन साइजिंग के साथ ट्रेड कर सके।
गलतियों को कम करना
साधारण गलतियां: हम अक्सर ट्रेडिंग में कुछ-न-कुछ गलतियां करते रहते हैं, यह गलतियां बहुत छोटी होती है इसलिए हम इन्हें लिखते भी नहीं है।
लेखक बताते हैं कि हम कुछ कॉमन गलतियां करते हैं यह इस प्रकार है इमोशन के साथ ट्रेड लेना, अपने इमोशंस पर ध्यान ना देना, खुद अपनी गलती मानने के बजाय दूसरों पर दोष देना, एंट्री से पहले एग्जिट एरिया का पता ना होना आदि।
ट्रेडिंग सफलता का रहस्य है keep it simple।
Keep it simple: ट्रेडिंग में लोग इसलिए असफल नहीं होते कि वे कुछ नहीं जानते। वे बहुत कुछ जानते हैं और बहुत कुछ जानने की इच्छा भी रखते हैं। यहां पर गलती यह होती है कि ट्रेडर्स उलझनों में इतने उलझ जाते हैं की Simplicity को भूल जाते हैं।
हम अपने सिस्टम, मनी मैनेजमेंट, बिजनेस प्लान, entry-exit सिस्टम को जितना simple रखेंगे, हमारी सफलता की उम्मीद उतनी ही बढ़ जाती है।
ट्रेडिंग बिजनेस से पैसा बढ़ाना: ट्रेडिंग बिजनेस से हम अनेक प्रकार से अपने पैसे को बढ़ा सकते हैं। लेखक हमें कई तरीके बताते हैं जिसे हम फॉलो कर सकते हैं।
- ट्रेडिंग सिस्टम को बेहतर बनाकर।
- अलग-अलग प्रकार के मार्केट में अपने सिस्टम को टेस्ट करके।
- नए ट्रेडर्स को जोड़कर।
- नए ट्रेडर्स को ट्रेडिंग में हेल्प करके उन्हें बेहतर बनाकर।
- अपनी पोजीशन साइजिंग को मैनेज करके जो हमारे उद्देश्य की ओर ले जाती हो।
निष्कर्ष
Super Trader बुक समरी से हमने पांच बातें सीखी जो इस प्रकार है;
- हम खुद पर काम करके अपनी ट्रेडिंग की संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं।
- बिजनेस प्लान होने से हम ट्रेडिंग में बिजनेस की तरह व्यवहार करते हैं ना की जुआरी की तरह।
- एक बेहतर ट्रेडिंग प्लान हमें प्रॉफिट तो बना कर देता है साथ ही हमारा रिस्क भी मैनेज करता है।
- पोजीशन साइज हमारी संभावनाओं के अनुसार प्रॉफिट बनाने में मदद करती है।
- जो व्यक्ति अपनी गलतियों से सीखता है उसे सफलता प्राप्त करने से कोई रोक नहीं सकता।