Option Trading Psychology बुक हमें डर, लालच, चिंता जैसे नकारात्मक पहलुओं पर मास्टर बनने की ओर ले जाती है। साथ ही इन पहलुओं को समझने और मैनेज करने के लिए अनुसासन, धैर्य और कमिटमेंट जैसी स्ट्रेटेजी विकसित करने पर भी जोर देती है। इस बुक की सबसे अच्छी बात यह है कि नकारात्मक भावनाओं से निपटने के लिए अनेक स्ट्रेटेजी देती है और स्पष्टता के लिए उदाहरण भी।
1.ऑप्शन ट्रेडर की मानसिकता
हम सभी के अंदर कुछ भावनाएं होती है जो हमारी मानसिकता विकसित करने में मदद करती है। यह मानसिकता हमें पता हो भी सकती है और नहीं भी। अच्छी बात यह है कि आत्म विश्लेषण द्वारा इन मानसिकताओं का पता लगाया जा सकता है और इन्हें बेहतर किया जा सकता है।
कुछ मानसिकता के उदाहरण इस प्रकार है;
- जल्दी अमीर बनने की मानसिकता: यहां ट्रेडर रातोंरात अमीर बनने के सपने लेकर ऑप्शन ट्रेडिंग में उतरता है।
- सीखने और विकास की मानसिकता: जिसमें ट्रेडर अपने सिस्टम और मार्किट को समझने पर जोर देता है।
- भयभीत और जोखिम से बचने वाली मानसिकता: यह मानसिकता हमें बेहतर ट्रेड लेने से रोकती है। नाकि उसे मैनेज करने की ओर ले जाती है।
- बुद्धिमान लेकिन अनुशासनहीन मानसिकता: यहां हममें अधिक बुद्धि होती है और मार्केट की समझ भी। पर हमारी एक कमजोरी यह होती है कि हम अपनी योजनाओं और नियमों का लगातार पालन करने में असमर्थ होते हैं।
- सही मानसिकता: कुछ ट्रेडर्स "सही" मानसिकता के अस्तित्व में विश्वास करते हैं, एक ऐसी स्ट्रेटेजी ढूंढना जो हमेशा सही हो, पर मार्किट में यह संभव नहीं है।
2.ऑप्शन ट्रेडर्स के मस्तिष्क की आंतरिक कार्यप्रणाली
हमारी भावनाओं के विकास और हमारे व्यवहार को दिशा देने में कुछ शाररिक केमिस्ट्री भी योगदान देती है जिसे शारीरिक गतिविधियों द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है।
किसी भी केमिकल हार्मोन को केमिकल और शारीरिक गतिविधि दोनों के द्वारा बढ़ाया या कम किया जा सकता है।कुछ हॉर्मोन, उनके प्रभाव और उन्हें मैनेज करने के तरीके इस प्रकार है;
भय और कॉर्टिसोल: ट्रेडिंग भय लगना आम बात है, जो शरीर के हार्मोन कॉर्टिसोल के कारण घटता-बढ़ता है। कॉर्टिसोल को मैनेज करने के लिए ध्यान लगाना, योग करना और अच्छी नींद लेना होता है।
लालच और डोपामाइन: लालच, वित्तीय लाभ की अतृप्त इच्छा, डोपामाइन के कारण कम-ज्यादा होती है , जो हमारे शरीर के रिवॉर्ड सिस्टम से जुड़ा एक हॉर्मोन है। डोपामाइन को मैनेज करने के लिए अपने कार्य की संतुष्टि को तुरंत की जगह देरी से प्राप्त करना एक अच्छा उपाय है।
आशा और एंडोर्फिन: ट्रेडिंग में आशा एक शक्तिशाली और प्रेरक भावना है, जो एंडोर्फिन के स्तर पर निर्भर करती है। जिसे मैनेज करने के लिए जॉगिंग करना, नाचना या फिर हँसी-मज़ाक वाली गतिविधियाँ में शामिल होना जरुरी है।
धैर्य और सेरोटोनिन: सेरोटोनिन, मन की स्थिरता और समग्र कल्याण के लिए जिम्मेदार है। धैर्य को बढ़ाने के लिए प्रतिदिन व्यायाम करना और कुछ समय सुबह के सूर्य के प्रकाश में बिताना मददगार हो सकता है।
3.लालच और उसका मैनेजमेंट
ऑप्शन ट्रेडिंग में लालच, अत्यधिक लाभ की तीव्र इच्छा और मुनाफे की निरंतर खोज है। यह अक्सर तब उभरता है जब ट्रेडर भारी रिटर्न की संभावना पर अड़े रहता है और इससे जुड़े जोखिमों को अनदेखा करता है।
ऑप्शन ट्रेडिंग में लालच की जड़ें बहुआयामी हैं और इसके लिए कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं: जैसे
- कम समय में अधिक लाभ की इच्छा।
- ट्रेड चूक जाने का डर।
- पिछली ट्रेडिंग सफलताएं।
- साथियों का दबाव।
- बाजार का प्रचार।
लालच को मैनेज करना, स्थायी ऑप्शन ट्रेडिंग की सफलता के लिए आवश्यक है। लालच को मैनेज करने के लिए कुछ रणनीतियाँ इस प्रकार है;
- यथार्थवादी लक्ष्य बनाना।
- ट्रेडिंग योजना पर टिके रहना।
- अपने रिस्क को पहचानना।
- धैर्य का अभ्यास करना।
- भावनात्मक जागरूकता बनाए रखना।
4.भय और उसका मैनेजमेंट
ऑप्शन ट्रेडिंग में डर, ट्रेड में शामिल जोखिम और अनिश्चितता के प्रति एक तीव्र भावनात्मक प्रतिक्रिया है। डर अक्सर चिंता, घबराहट या अधिक विनाश की भावना के रूप में प्रकट होता है, और यह ट्रेडर्स के निर्णयों को प्रभावित करता है।
ऑप्शन ट्रेडिंग में, भय के प्रभाव को कम करके नहीं आंका जा सकता। यह अनेक हानिकारक प्रभावों को जन्म दे सकता है जैसे;
- विश्लेषण सही से न करना।
- आवेगपूर्ण ट्रेडिंग निर्णय लेना।
- ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी की खामियों नहीं पहचानना।
- मानसिकता का लॉस।
ऑप्शन ट्रेडिंग में सफलता के लिए भय को मैनेज करना महत्वपूर्ण है। भय को मैनेज करने के लिए कुछ प्रक्रिया इस प्रकार है;
- अपने ज्ञान को बढ़ाना।
- अपनी भावनाओं को लिखकर उसका एनालिसिस करना।
- अपनी आदतों और कार्यों के पैटर्न को पहचानना।
- भावनाओं को नियंत्रण में रखना।
5.संज्ञानात्मक पूर्वाग्रह और भ्रांतियां और उनसे बचना
हम सभी में कुछ धारणाए और गलतियाँ होती हैं जो हमें हमारे लक्ष्यों से भटका सकती हैं। इन धारणाओं को हम पूर्वाग्रह कहते हैं। ये मानसिक शॉर्टकट की तरह हैं जिसे हमारा दिमाग बिना एहसास के अपना लेता है।
दूसरी ओर, भ्रांतियाँ या भ्रम हमारी सोच में एक त्रुटि हैं। जो हमारे तर्क में एक जाल की तरह काम करती हैं। भ्रम रेगिस्तान में होने वाली मृगतृष्णा की तरह हैं-जो पहली सत्य नज़र आती हैं, लेकिन वास्तव में वह हमारा भ्रम होता हैं।
पर्यावरण और समाज के कारण ट्रेडर्स संज्ञानात्मक पूर्वाग्रहों और भ्रांतियों के प्रति संवेदनशील होते हैं। ये ट्रेडर्स के निर्णय और किसी जानकारी पर एक्शन लेने को प्रभावित करती है।
संज्ञानात्मक पूर्वाग्रह और भ्रांतियां को मैनेज करने के लिए कुछ रणनीतियां इस प्रकार है;
- अपनी सोच के प्रति आत्म जागरूकता।
- अपने इमोशन को मैनेज करना।
- ट्रेडिंग प्लान फॉलो करना।
- अपने कार्य में फीडबैक लेना।
6.आशावाद और यथार्थवाद को संतुलित करना
आशा, ऑप्शन ट्रेडर्स की निर्णय लेने की प्रक्रिया पर प्रभाव डालती है। जब इसका विवेकपूर्ण तरीके से उपयोग किया जाता है, तो यह प्रेरणा का स्रोत बन जाती है और हमें सोच-समझकर जोखिम उठाने के लिए प्रोत्साहित करती है।
इसके विपरीत, जब इसे अनदेखा किया जाता है, तो यह कई पूर्वाग्रहों और हानिकारक व्यवहारों को जन्म देती है, जिसके परिणामस्वरूप हमें अधिकांश समय नुकसान झेलना पड़ता है।
आशा को मैनेज करने के कुछ उपाय इस प्रकार है;
- अपने विचारों की एक डायरी बनाए।
- सचेत ट्रेडिंग का अभ्यास करना।
- ट्रेडिंग योजना में पर ध्यान देना।
- ट्रेडिंग परिणाम से अलगाव रखना।
7.अफसोस से विकास तक
पछतावा हमेशा मौजूद रहने वाला साथी है। ट्रेडिंग में पछतावा दो कारणों से होता है पहला कोई ट्रेड छूट जाने पर और दूसरा अपने निर्णय गलत होने पर।
पछतावा एक निष्क्रिय भावना नहीं है, यह ऑप्शन ट्रेडर्स के व्यवहार और प्रदर्शन को प्रभावित करने वाली भावना है। जो हमें कुछ इस प्रकार प्रभावित करती है;
- रिवेंज ट्रेडिंग करना।
- अति आत्मविश्वासी होकर ट्रेड लेना।
- निर्णय को संभावनाओं में न सोचकर।
- सही गलत का अनुमान लगाना।
- दीर्घकालिक लक्ष्यों को बदलते रहना।
पछतावे के नुकसान से बचने के कुछ उपाय इस प्रकार है;
- पूर्वनिर्धारित नियम को फॉलो करना।
- पछतावे का विश्लेषण करना।
- जोखिम को समझना।
- खुद को लगातार शिक्षित करना।
- एक एग्जिट स्ट्रॅटजी का उपयोग करना।
8.ट्रेडिंग डिसिप्लिन
ट्रेडिंग अनुशासन, एक अच्छी तरह से परिभाषित ट्रेडिंग योजना, नियमों और सिद्धांतों का एक समूह, जो हमारा ट्रेडिंग करते समय मार्गदर्शन करता है।
ऑप्शन ट्रेडिंग के जटिल क्षेत्र में, जहाँ अस्थिरता और अप्रत्याशितता निरंतर हमारी साथी होती हैं, ऐसे में डिसिप्लिन हमारे लिए ट्रेडिंग कैपिटल बचाने और आवेगपूर्ण निर्णयों के खिलाफ एक हथियार के रूप में कार्य करता है जो विनाशकारी नुकसान के कारण बन सकते हैं।
ट्रेडिंग अनुशासन रातों रात विकसित नहीं किया जा सकता, यह आत्म-निपुणता और निरंतर सुधार की यात्रा है।इसलिए हमें इन पहलुओं को बेहतर करना होता है;
- स्पष्ट ट्रेडिंग योजना बनाना।
- रिस्क मैनेजमेंट फॉलो करना।
- भावनात्मक नियंत्रण विकसित करना।
- ट्रेडिंग प्लान को एनालिसिस करना।
- नियमित व्यायाम और स्वस्थ भोजन ग्रहण करना।
9.धैर्य की शक्ति
ऑप्शन ट्रेडिंग की तेज गति वाली दुनिया में, धैर्य अक्सर वह गुमनाम नायक होता है जो विवेकशील ट्रेडर को आवेगशील सट्टेबाजी से अलग करता है।
सही अवसरों की प्रतीक्षा करने का अर्थ है सफलता की उच्च संभावना वाले ट्रेडों में प्रवेश करना। इससे प्रॉफिट की संभावना बढ़ जाती है और नुकसान का जोखिम कम हो जाता है।
धैर्य को अपनी ट्रेडिंग योजना में कुछ इस प्रकार फॉलो कर सकते है;
- संभावनाओं को अधिकतम करना।
- कम संभावना वाले ट्रैड से बचना।
- मार्केट के ट्रेंड के साथ तालमेल बिठाना।
- भावनात्मक तनाव को कम करना।
- चयनात्मकता को अपनाना।
10.नुकसान से निपटना और उबरना
ट्रेडिंग की दुनिया अनिश्चितता से भरी है जहाँ हमारी भावनाओं में तेजी से उतार-चढ़ाव अनुभव करने को मिलता हैं। जब ट्रेडर्स को नुकसान का सामना करना पड़ता है, तो भावनाओं का एक नकारात्मक समूह उन्हें घेर लेता है, यह प्रक्रिया सभी ट्रेडर्स में देखने को मिलती है।
ट्रेडिंग में लॉस होने पर हम जो सामान्य प्रतिक्रियाएं देते है वे कुछ इस प्रकार है:
- अपने रिस्क को मैनेज करने से इनकार करना।
- अपने ट्रेडिंग सिस्टम के रूल से अलगाव रखना।
- लॉस का पीछा करना।
- मार्केट में विश्वास खोना।
लॉस से निपटने के लिए कुछ रणनीतियां फॉलो कर सकते है जो इस प्रकार है;
- प्रॉफिट और लॉस को स्वीकार करना सीखना।
- भावनात्मक लचीलेपन को अपनाना।
- जर्नलिंग और आत्म-चिंतन करना।
- स्टॉप-लॉस ऑर्डर सेट करना।
- ट्रेडिंग पोजीशन को मैनेज करना।
11.आत्मविश्वास का निर्माण करना
अपने सिस्टम में आत्मविश्वास पैदा करने का एक बुनियादी कदम यह है कि अपनी ट्रेडिंग स्टाइल को समझना। हमारी ट्रेडिंग स्टाइल, हमें यह समझने में मदद करती है कि हम मार्केट के प्रति कैसी भावना रखते है, और प्रॉफिट और लॉस पर कैसी प्रतिक्रिया देते है।
आत्मविश्वास बढ़ाने की कुछ महत्वपूर्ण रणनीतियाँ इस प्रकार है;
अपनी ट्रेडिंग स्टाइल को परिभाषित करना: ट्रेडिंग स्टाइल उतनी ही अलग-अलग हो सकती हैं, जितने कि ट्रेडर्स स्वयं होते हैं। कुछ ट्रेडिंग स्टाइल जैसे डे ट्रेडिंग, स्विंग ट्रेडिंग, पोजीशन ट्रेडिंग, स्कल्पिंग और एल्गोरिथम ट्रेडिंग।
अपने ट्रेडिंग सिस्टम को अपने व्यक्तित्व से जोड़ना; हम सभी में कोई खास गुण ज्यादा एक्टिव होता है जैसे जोखिम सहनशीलता, धैर्य, एनालिटिकल स्किल, भावनात्मक लचीलापन आदि जो हमें एक ट्रेडिंग बढ़त देता है।
ट्रेडिंग टाइम फ्रेम; हमारे द्वारा चुने गये टाइम फ्रेम में वोलैटिलिटी भी हमारे आत्मविश्वास बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए हमें अपने ट्रेडिंग टाइम फ्रेम को समझना जरुरी है।
प्रोसेस पर ध्यान दे नाकि रिजल्ट पर; कुछ ट्रेडर्स अपनी सफलता को रिजल्ट के अनुसार नापते है, जिससे उन्हें अपने सिस्टम की कमियां और खामियां दिखाई नहीं देती है। वहीं प्रोसेस पर ध्यान देने से हम देर-सवेर बेहतर रिजल्ट पाने लगते है।
12.साथियों के दबाव और राय से निपटना
ट्रेडिंग समुदाय ऑनलाइन या ऑफ़लाइन समूह होते हैं, जहाँ ट्रेडर्स बाज़ार के ट्रेंड पर चर्चा करने, रणनीतियाँ साझा करने और सहायता प्रदान करने के लिए एक साथ आते हैं।
ट्रेडिंग में साथियों का दबाव अलग-अलग रूपों में प्रकट हो सकता है, जिसमें कुछ इस प्रकार है;
- समाचार चैनल और फाइनेंसियल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म।
- सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म।
- फाइनेंसियल विशेषज्ञ और फाइनेंसियल कंपनी के द्वारा।
इन बाहरी प्रभावों से निपटने की कुछ रणनीतियां इस प्रकार है;
- खुद से सिस्टम बनाना और रिसर्च करना।
- सोशल मीडिया सलाह को उपयोग से पहले जांच करना।
- एक्सपर्ट और अपनी राय को अलग-अलग रखना।
- न्यूज़ के उपयोग से पहले मार्केट के रिएक्शन को जानना।
13.थकान और तनाव से बचना
संतुलीत जीवन बनाना और उसे बनाए रखना, ट्रेडिंग सफलता के लिए जरुरी है। क्योंकि ऑप्शन ट्रेडिंग में होने वाला उतार-चढ़ाव और पल-पल बदलती हमारी भावनाये एक ट्रेडर के स्वास्थ्य और रिश्तों पर भारी पड़ सकती है यदि इसे प्रभावी ढंग से मैनेज नहीं किया जाता है तो।
तनाव को मैनेज करने की कुछ रणनीतियाँ इस प्रकार है;
- रिस्क मैनेज करना।
- स्टॉप लॉस के साथ ट्रेड को मैनेज करना।
- निरंतर सीखना।
- शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना।
- समय-समय पर ट्रेडिंग से छुट्टी लेना।
14.विभिन्न मार्केट परिस्थितियों में ट्रेडिंग का मनोविज्ञान
मार्केट की परिस्थितियों, फाइनेंसियल बाजारों की मौजूदा स्थिति को बताती है, जिसे तीन भागों में बाटा गया है; बुलिश, बेयरिश और साइडवेज मार्केट। ये सभी परिस्थितियां ऑप्शन ट्रेडर्स को पैसे बनाने में मदद करती हैं।
बुलिश मार्केट; आशावाद, बढ़ती कीमतों और फाइनेंसियल मार्केट में सकारात्मकता का समय होता हैं। जो सभी को लाभ के अवसर प्रदान करता हैं, इस समय में आने वाले ट्रेडर्स के अति आत्मविश्वास के कारण निर्णय लेने की संभावना अधिक होती है।
बेयरिश मार्केट; जिसमें संपत्तियों की कीमतों में गिरावट, निराशावाद और व्यापक भय शामिल होता है। यह मार्केट ऑप्शन ट्रेडर्स के लिए भय और घबराहट, जैसी परिस्थितियां पैदा करता है, जिससे बचने के लिए रिस्क मैनेजमेंट फॉलो करना होता है।
साइडवेज मार्केट; जिसमें सीमित प्राइस मूवमेंट और अनिश्चितता होती है। यह ऑप्शन ट्रेडर्स के लिए धैर्य और हताशा जैसी परिस्तितियाँ पैदा होती है, जिससे बचने के लिए धैर्य रखना, रेंज ट्रेडिंग करना, और टेक्निकल एनालिसिस उपयोगी हो सकता है।
15.व्यक्तिगत ट्रेडिंग मनोविज्ञान की योजना बनाना
एक व्यक्तिगत ट्रेडिंग योजना, ट्रेडिंग की जटिल परिस्तिथियों में कम्पास की तरह कार्य करती है जो हमारे ट्रेडिंग अनुशासन को मजबूत करने और हमारे निर्णय लेने के कौशल को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
आत्म-मूल्यांकन और लक्ष्य निर्धारण के कुछ प्रश्न इस प्रकार है;
- लाभ और हानि के प्रति हमारी भावनात्मक प्रतिक्रिया क्या है?
- हमारी जोखिम सहनशीलता क्या है?
- अनुशासित रहने की हमारी क्षमता कितनी अच्छी है?
एक अच्छी तरह से मैनेज ट्रेडिंग रूटीन, ट्रेडिंग की दुनिया में स्थिरता और सफलता की रीढ़ है। जिसे जानने के प्रश्न इस प्रकार है;
- ट्रेडिंग को अनदेखा करते हुए हमारी दैनिक व्यक्तिगत जीवन की दिनचर्या क्या है?
- हमारी मौजूदा दैनिक ट्रेडिंग रूटीन क्या है?
- हमारे विचार में हमारी दिनचर्या कैसी दिखती है?
ट्रेडिंग जर्नल बनाना; एक सफल ट्रेडर बनने की यात्रा में ट्रेडिंग जर्नल एक अमूल्य उपकरण है। जिसमें हम प्राइस की समझ, भावनाओं का मैनेजमेंट, आवश्यक जानकारी रिकॉर्ड करना, ट्रेड का विवरण, मार्केट की स्थिति, ट्रेडिंग योजना का पालन, प्रॉफिट और लॉस जैसी चीजों को लिखते और एनालिसिस करते है।
16.फुल टाइम ट्रेडिंग करियर बनाना।
फुल टाइम ट्रेडर बनने का सपना ट्रेडर्स के बीच एक आम इच्छा है। यह इच्छा ट्रेडिंग के आकर्षण, वित्तीय स्वतंत्रता, असीमित कमाई की संभावना और वित्तीय बाजारों के लिए जुनून के कारण हममें विकसित होती है।
यह जितना रोमांचक लगता है उतना ही कठिन भी है, क्योंकि यह भावनाओं पर चलने वाला खेल है जिसमें नियमों को फॉलो करना और समय आने पर अपडेट भी करना होता है। बहुत कम ट्रेडर्स होते है जो ट्रेडिंग को एक बिज़नेस मानकर लम्बे समय तक इसमें टिके रहते है।
फुल टाइम ट्रेडिंग करियर बनाने से पहले हमें इन बातों को समझना होगा।
निर्णय लेने की प्रक्रिया; ट्रेडिंग में पैसे बनाने के लिए रिस्क मैनेजमेंट, ट्रेडिंग स्किल मैनेजमेंट, ट्रेड मैनेजमेंट, अनुसासन मैनेजमेंट, कानून मैनेजमेंट जैसे पर महरत हाशिल करनी होगी।
पारिवारिक प्रभाव; फुल टाइम ट्रेडर में परिवर्तन का निर्णय केवल व्यक्तिगत नहीं होता; इसका प्रभाव एक ट्रेडर के पारिवारिक जीवन पर भी पड़ता है। इसलिए अपने परिवार को छह महोने पहले बताये कि हम फुल टाइम ट्रेडिंग की ओर कदम बढ़ाने वाले है।
निष्कर्ष
हर मार्केट परिस्थिति के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता नहीं होती। ऑप्शन ट्रेडिंग की दुनिया में दीर्घकालिक सफलता के लिए इच्छाओं को संतुलित करने की कला में निपूर्ण होना होता है।
आशा एक मार्गदर्शक और प्रकाशक हो सकती है, लेकिन ऑप्शन ट्रेडिंग की दुनिया में दीर्घकालिक सफलता के लिए इसे अनुशासीत करना होता है।
ऑप्शन ट्रेडिंग में प्रक्रिया मायने रखती है, नाकि परिणाम।
हर दिन एक अवसर है, जब तक मैं अपना ट्रेडिंग खाता नहीं खो देता। इसलिए मैं कुछ भी चूक नहीं सकता, एक ट्रेड चले जाने पर अगले ट्रेड की तैयारी करनी है नाकि पिछले ट्रेड के बारे में सोचना है।