क्या आप जानते हैं कि विश्वास क्या है और किसे कहते हैं? यह मेरा विचार है कि 'किसी बात को मान लेना ही विश्वास कहलाता है।' यहाँ बात कुछ भी हो सकती है, जैसे कोई घटना, कल्पना या तथ्य आदि।
यहाँ विश्वास का उपयोग अपनी कल्पनाओं को सच में परिवर्तित करने के संदर्भ में किया गया है। इस कार्य में हमारे विचार, भावनाएँ, बोले गए और सोचे गए शब्द महत्वपूर्ण हैं। इनमें से भावनाओं की मुख्य भूमिका है।
भावनाएँ दो प्रकार की होती हैं सकारात्मक और नकारात्मक। खुशी, कृतज्ञता, आशा, प्यार, उत्साह, आश्चर्य और शांति सकारात्मक भावनाएँ हैं, जिनका अधिक से अधिक उपयोग करना है। डर, क्रोध, उदासी, घृणा, चिंता, ईर्ष्या और अपराध-बोध नकारात्मक भावनाएँ हैं, जिनसे बचने का प्रयास करना है।
इस बुक को समझने के लिए विश्वास और भावनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर ली है। अब बुक पर आते है -हमारा दिमाग दो प्रकार से कार्य करता है एक चेतन रूप से, दूसरा अवचेतन रूप से। आगे हम इनके बारे में बहुत कुछ जानेंगे। साथ ही, इनके उपयोग करने के तरीके भी सीखेंगे।
1. चेतन मन कैसे कार्य करता है
लेखक के अनुसार, हमारा मस्तिष्क दो भागों में बँटा हुआ है -चेतन और अवचेतन। चेतन मस्तिष्क तार्किक होता है, जबकि अवचेतन मस्तिष्क नहीं।
हम पहली बार जिस जानकारी को देखते और सुनते हैं, वह सभी हमारे चेतन मन में संग्रहीत होती है। दिन भर की सभी जानकारियों को इकट्ठा करने के बाद, नींद के समय हमारा दिमाग उनकी छँटनी करता है। जो जानकारी उपयोगी होती है, उसे रख लेता है और बाकी की जानकारी भूल जाता है।
चेतन मन एक माली की तरह होता है, जो अपने बगीचे-रूपी अवचेतन मन में विचार-रूपी बीज बोता है।
चेतन मन में दोहराए जाने वाले कार्यों और विचारों को अवचेतन मन तक पहुँचाने तथा उन्हें आदत में बदलने की शक्ति होती है। वही चेतन मन सालों से चली आ रही आदतों को अवचेतन से चेतन में लाकर छोड़ने में भी मदद करता है।
हमारे द्वारा दोहराया गया हर शब्द, बात, विचार और कार्य मायने रखता है। इसलिए इन्हें अपने लिए बहुत सावधानी से चुनें।
2. अवचेतन मन की शक्ति
चेतन मन में बार-बार दोहराए गए कार्य, विचार और शब्द अवचेतन मन में पहुँच जाते हैं। अवचेतन मन तक पहुँचने वाली हर बात विश्वास से भरपूर होती है। यहाँ पहुँचने वाली झूठी बातें भी सच्ची लगती हैं।
अवचेतन मन की यात्रा में दोहराव ही मुख्य तथ्य है, जो हमारे कार्य और कल्पना के हकीकत में बदलने की संभावना बढ़ा देता है। कुछ चीज़ों में यह मायने रखता है कि बात या कार्य कितनी बार दोहराया गया, और कुछ में यह कि उसे कितने समय तक दोहराया गया।
एक कहावत है कि, ''आप जैसा बनना चाहते हैं, उस प्रकार से सोचें।'' क्योंकि हम जिन विचारों को प्रतिदिन दोहराते हैं, वे विचार हमारे अवचेतन मन द्वारा ग्रहण कर लिए जाते हैं। और हमारा अवचेतन मन उन्हें साकार करने के लिए अपना कार्य शुरू कर देता है।
यह विश्वास की शक्ति है। इसे मानो तो हमेशा काम करती है, न मानो तो दोहराने के बाद भी परिणाम नहीं देती है।
3. विचारों और योजनाओं को अवचेतन तक पहुँचाना।
याद रखें, कार्यों और विचारों का चुनाव हमारे हाथ में है, परिणाम नहीं। इसलिए हम क्या चुनते हैं, यही आगे चलकर हमें सफलता या असफलता दिलाता है।
विचारों का स्पष्ट होना ज़रूरी है, ताकि हम अपने लिए एक योजना बना सकें। हार-जीत से ऊपर उठकर उस योजना को पूरा करने के लिए कार्य करें। इस योजना को अपने अवचेतन मन तक पहुँचाने के लिए इसे दिन में तीन बार दोहराएँ।
जब तक योजना पूरी न हो जाए, तब तक ऐसा करते रहें। बाकी सभी अनावश्यक विचारों और विकल्पों को कुछ समय के लिए किनारे कर दें, ताकि आपका ध्यान केवल अपने लक्ष्य पर बना रहे।
अवचेतन मन को देने वाले कुछ विचार इस प्रकार है कि मेरी योजनाएँ सफलतापूर्वक पूरी हो रही हैं। मैं हर दिन अपना सर्वश्रेष्ठ दे रहा हूँ। इन विचारों को केवल शब्दों के रूप में न दोहराएँ, बल्कि उन्हें भावना के साथ अनुभव करने का प्रयास करें।
4. अवचेतन से मानसिक उपचार
हम अधिकांश समय बीमारियों से कम और अपने विचारों से अधिक बीमार होते हैं। कुछ बीमारियों के लक्षण देखे जा सकते हैं, लेकिन मानसिक बीमारियों के लक्षण बहुत कम दिखाई देते हैं।
जब हम कहते हैं कि हम बीमार हैं और इसे बार-बार दोहराते हैं, तो इससे हम बीमार होने लगते हैं। क्योंकि हमारा अवचेतन मन यह मान लेता है कि हम बीमार हैं।
इसलिए हमें कभी भी अपनी बीमारियों के बारे में बातें नहीं करनी हैं या जितनी ज़रूरी हो, उतनी ही बात करनी है, ताकि हम अपनी बीमारियों को अधिक न दोहराएँ और न ही यह हमारे अवचेतन मन तक पहुँचे।
मानसिक बीमारियों के उपचार के लिए हम अपने अवचेतन मन को अच्छे विचारों से पोषित कर सकते हैं। जैसे, हम अपने आप से कह सकते हैं कि
- हम जल्दी ही स्वस्थ होने वाले हैं।
- हमारा शरीर बहुत जल्दी स्वस्थ हो जाता है।
- इन बीमारियों से अधिक परेशान होने की आवश्यकता नहीं है।
- मैं धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहा हूँ।
इस प्रकार के विचार बार-बार दोहराने से हमारा अवचेतन मन यह मानने लगता है कि हम स्वस्थ हो रहे हैं और हम स्वस्थ हो जाते हैं।
5. अवचेतन का पैसो पर प्रभाव
बार-बार गरीबी के विचार दोहराने वाला व्यक्ति एक दिन गरीब बन जाता है। उसी प्रकार, बार-बार अमीरी के विचार दोहराने और उसी तरह कार्य करने वाला व्यक्ति एक दिन अमीर बन जाता है। यही अवचेतन मन की शक्ति है।
अधिकांश लोग इसलिए अमीर नहीं बन पाते हैं क्योंकि वे पैसे को बुरा मानते हैं या पैसे से प्रेम करना सभी बुराइयों की जड़ मानते हैं। इस प्रकार की भावनाएँ अमीरी को हमसे दूर ले जाती हैं।
क्योंकि जिनकी हम आलोचना करते हैं, वे एक दिन हमसे दूर चले जाते हैं, न कि हमारे पास आते हैं। दूसरा कारण यह है कि अमीर व्यक्तियों को देखकर उनसे ईर्ष्या रखना भी हमारी पैसों के प्रति मानसिकता पर प्रभाव डालता है।
धन को आकर्षित करने के लिए अपने अवचेतन मन को पैसों के अच्छे विचारों से पोषित करना ज़रूरी है। यह भी सच है कि धन कमाने के लिए जितनी मेहनत की आवश्यकता होती है, उससे अधिक सही मानसिकता और बुद्धिमत्ता की भी आवश्यकता होती है।
अवचेतन मन को अपनी अमीरी के विचार देने से पहले यह जान लें कि हर महीने कितने पैसे प्राप्त करने के बाद आप आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो जाएँगे। उन स्पष्ट आँकड़ों को दोहराव के द्वारा अवचेतन मन तक पहुँचाने का प्रयास करें और अवचेतन मन द्वारा भेजे गए मौकों पर कार्य करें।
निष्कर्ष
चेतन और अवचेतन मन हमारे विचारों, भावनाओं, शब्दों और कार्यों से निरंतर प्रभावित होते हैं। हम जिन बातों को बार-बार सोचते, बोलते और अनुभव करते हैं, वे धीरे-धीरे हमारी आदतों और व्यवहार का हिस्सा बन जाती हैं। इसलिए अपने विचारों का चयन सावधानीपूर्वक करना आवश्यक है।
सकारात्मक सोच तभी प्रभावी होती है, जब उसके साथ स्पष्ट लक्ष्य, सही योजना, निरंतर प्रयास और धैर्य भी जुड़ा हो। केवल कल्पना या दोहराव पर्याप्त नहीं है; उन्हें सार्थक कार्यों के साथ जोड़ना भी उतना ही आवश्यक है।
यदि हम अपने मन को सकारात्मक विचारों, अच्छी भावनाओं और उपयोगी आदतों से पोषित करें तथा निरंतर अपने लक्ष्यों की दिशा में कार्य करते रहें, तो समय के साथ अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। अंततः, हमारे विचार दिशा देते हैं, हमारे कार्य परिणाम बनाते हैं, और दोनों मिलकर हमारे भविष्य का निर्माण करते हैं।
अवचेतन मन और मानसिक स्वास्थ्य के विषय में अधिक जानकारी के लिए American Psychological Association (APA) – Psychology Topics और National Institute of Mental Health (NIMH) की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।